Font by Mehr Nastaliq Web

श्री श्रीठाकुर अनुकूलचन्द्र के उद्धरण

मत अनेक हो सकते हैं; यहाँ तक कि जितने मनुष्य हैं उतने मत हो सकते हैं, किंतु इससे धर्म अनेक नहीं हो सकता।

अनुवाद : श्रीरामनंदन प्रसाद