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विश्वनाथ त्रिपाठी के उद्धरण

मनुष्य ने बहुत साधना करके जिस भाषा का विकास किया है; उसके शब्द जीवन-जगत् को अमूर्त करते हैं, इसलिए शब्द विचारों के समर्थ माध्यम हैं, अनुभूति के नहीं।