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विक्टर ई. फ्रैंकल के उद्धरण

मनुष्य की प्रधान चिंता यह नहीं कि वह सुख प्राप्त करे या स्वयं को पीड़ा से दूर रखे, वह तो दरअसल अपने जीवन के लिए एक अर्थ पाना चाहता है।

अनुवाद : रचना भोला 'यामिनी'