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महादेवी वर्मा के उद्धरण

मनुष्य-जाति का बर्बरता की स्थिति से निकल कर, मानवीय गुणों तथा कला-कौशल की वृद्धि करते हुए, सभ्य और सुसंस्कृत होते जाना ही उसका विकास है।