Font by Mehr Nastaliq Web

कृष्ण बिहारी मिश्र के उद्धरण

मैं सोचता हूँ, जो दूसरे के उन्मुक्त उल्लास से अगरा नहीं उठता, उसे दूसरे की पीड़ा परेशान कैसे करेगी?