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कृष्ण बिहारी मिश्र के उद्धरण

भोग की राजनीति ही वह दैत्य है जिसने मानवीय संवेदना का गला घोंट दिया और सार अन्तवैयक्तिक संबंध छिन्न-भिन्न हो गये।