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गजानन माधव मुक्तिबोध के उद्धरण

क्या यह आधुनिक भाव-बोध के अंतर्गत नहीं है कि मैं अपनी लेखनी द्वारा किसी विशेष लोकादर्श के लिए कविता लिखूँ?