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इलाचंद्र जोशी के उद्धरण

क्षण का अनुभव अनंत में और अनंत का अनुभव क्षण में कराने वाली वह वैयक्तिक चेतना ही मूल जीवन-धारा की एक मात्र उपलब्धि और सार्थकता है।