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पॉलो फ़्रेरा के उद्धरण

क्रांति न तो नेताओं द्वारा जनता के लिए होती है, न जनता द्वारा नेताओं के लिए—वह तो दोनों की अटल एकजुटता में होती है

अनुवाद : रमेश उपाध्याय