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महात्मा गांधी के उद्धरण

किसी भी धर्म में हुए प्रसिद्ध व्यक्तियों के जीवन चरित्र में दोष मालूम होने पर, उस पर ज़ोर देकर उस धर्म को कोसना निंदकों का तरीक़ा है, परंतु ऐसे दोष को दूसरों के लिए आचरण में लाने के नियम की भाँति पेश करना अधर्म हैं और उसका विरोध किया जा सकता है।