अवनींद्रनाथ ठाकुर के उद्धरण
काव्य में पुनरुक्ति एक बहुत बड़ा दोष है। पुनरुक्ति सिर्फ़ वहाँ ही शोभा देती है, जहाँ उक्ति का समर्थन बार-बार एक ही बात कहते हुए करना पड़ता हो।
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