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विनोबा भावे के उद्धरण

काव्य के लिए केवल प्रकटता की ही नहीं, बल्कि अ-प्रकटता की भी ज़रूरत होती है। केवल अंधकार नहीं; केवल प्रकाश नहीं, ऐसा बीच का काल काव्य के लिए हमेशा अनुकूल होता है। संधिकाल और उषःकाल में काव्य सूझता है।