अवनींद्रनाथ ठाकुर के उद्धरण
कवि की भाषा अगर बांग्ला है, तो बांग्ला अच्छी तरह सीखे बिना एक अँग्रेज़ उसे नहीं समझ पाएगा; वैसे ही चित्र की भाषा, अभिनय की भाषा—इन सबको भी अगर द्रष्टा की आँखें दुरुस्त न हों तो—समझना मुश्किल है।
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