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विश्वनाथ त्रिपाठी के उद्धरण

कभी-कभी अनुभूति बोध की कमी पूरी कर देती है। जैसे बोध अपने में अनुभूति को छिपाए रहता है, वैसे अनुभूति में भी बोध के सूक्ष्म तंतु सक्रिय रहते होंगे।