कभी हार नहीं मानना चाहिए। यह सबक़ कोई ख़ास गंभीर नहीं लगता; लेकिन जीवन आपको लगातार ऐसी परिस्थितियों में डालता है, जहाँ डटे रहने की तुलना में छोड़ देना ज़्यादा आसान लगता है। जहाँ आपके सामने बहुत सारी मुश्किलों का ढेर लग जाए, तो हार मान लेना तर्कसंगत बात लगती ही है।
अनुवाद :
महेंद्र नारायण सिंह यादव