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वात्स्यायन के उद्धरण

कामसुख की सफलता के लिए रूप (सौंदर्य) प्रथम आकर्षण है, जिस पर आकर्षित होकर नायक अपना सब कुछ न्योछावर करने को तैयार रहता है। क्योंकि मनुष्य सौंदर्योपासक होता है, उसमें सौंदर्य के प्रति अनुराग होता है—आकर्षण होता है।