Font by Mehr Nastaliq Web

भामह के उद्धरण

जो प्रतिज्ञा प्रत्यक्ष प्रमाण से ही बाधित हो, अर्थात् प्रत्यक्ष प्रमाण से ही अयथार्थ (असत्य) सिद्ध हो जाए, उसे प्रत्यक्षबाधिनी प्रतिज्ञा कहते हैं। यथा, अग्नि शीतल है, रूप का अस्तित्व नहीं है, चंद्रमा उष्ण है।

अनुवाद : रामानंद शर्मा