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अवनींद्रनाथ ठाकुर के उद्धरण

जो नृतत्त्व विज्ञानी होते हैं, उन्होंने मनुष्यों का वर्ग-विभाजन उनकी मुखाकृति और दैहिक लंबाई-चौड़ाई के आधार पर किया है, उन्होंने किसी को तो आर्य कहा है और किसी को अनार्य। उससे यह प्रमाणित होता है कि आर्यों ने भारत में आकर, अनार्यों के बीच अपनी बस्तियाँ बनाईं और धीरे-धीरे अनार्यों को सभी दृष्टियों से जीतकर, आर्यावर्त नाम के एक विशाल साम्राज्य की स्थापना की।

अनुवाद : रामशंकर द्विवेदी

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