जो लोग हिंदी को मातृभाषा मानते हैं; उनके सामने स्पष्ट ढंग से वह बात सदा रहनी चाहिए कि हिंदी की जो इधर उन्नति हुई, वह उसकी आगामी बाढ़ के लिए कदापि ऐसी नहीं है कि हम समझ लें कि अब गाड़ी चलती जाएगी, वह रुकेगी नहीं; अब हमें चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। हिंदी की स्वाभाविक गति के लिए तो अनेक बाधाओं के हटाने की आवश्यकता है।