श्री श्रीठाकुर अनुकूलचन्द्र के उद्धरण
जो कर्म मन का प्रसारण ले आता है, वही सुकर्म है और जिससे मन में संस्कार, कट्टरता इत्यादि आते हैं; फलस्वरूप जिससे मन संकीर्ण होता है, वही कुकर्म है।
-
संबंधित विषय : पाप