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वेंकी रामकृष्णन के उद्धरण

जीवन के विस्तार की इच्छा रखना, मरीचिका के पीछे भागने जैसा है। असली अमरता से कम कुछ भी, कभी पर्याप्त नहीं होगा और वह कभी नहीं होती। अगर हम बुढ़ापे पर जीत हासिल कर लें, तो भी हम हादसों, युद्ध, महामारी या पर्यावरण की त्रासदियों में जान गंवा सकते हैं। सबसे सरल यह होगा कि हम मान लें कि जीवन सीमित है।

अनुवाद : अमित कुश