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श्री श्रीठाकुर अनुकूलचन्द्र के उद्धरण

जिसे मंगल समझोगे, जिसे सत्य समझोगे, मनुष्य से उसे कहने के लिए हृदय व्याकुल हो उठेगा। मनुष्य चाहे तुम्हे जो भी क्यों न कहें, मन पर कुछ भी असर नहीं पड़ेगा, किंतु मनुष्य को सत्यमुखी देखकर आनंद होगा—तभी उसे प्रचार कहा जाएगा।

अनुवाद : श्रीरामनंदन प्रसाद