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महादेवी वर्मा के उद्धरण

जिस समाज में इतनी अधिक संख्या में व्यक्ति आत्म-हनन के लिए विवश किए जाते हों, अपने स्वस्थ और सुंदर शरीर को व्याधिग्रस्त कुरूप तथा निर्दोष मन को दूषित बनाने के लिए बाध्य किए जाते हों, उस समाज की स्थिति कभी स्पृहणीय नहीं कही जा सकती।