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नामवर सिंह के उद्धरण

जिस प्रकार वर्तमान से असंतुष्ट मन अतीत की ओर भागता है, उसी तरह इस जगत् से असंतुष्ट होकर किसी अन्य जगत् की खोज में निकल पड़ता है, और न मिलने पर कल्पना के द्वारा एक सुखद लोक की सृष्टि कर डालता है।