श्रीमद् राजचंद्र के उद्धरण
जिस प्रकार नींद से जागने पर करोड़ों वर्षों से चलता स्वप्न भी छूट जाता है, उसी प्रकार आत्मज्ञान प्रकट होते ही अनादिकाल का विभाव दूर हो जाता है।
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