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हरिशंकर परसाई के उद्धरण

जिस मनुष्य में हीनता की भावना होती है; वह दूसरे की निंदा करके, उसे हीन सिद्ध करके अपनी हीनता से छुटकारा पाने की कोशिश करता है।