जिस जाति में बच्चे की बलि को धर्म-साधना माना जाए, विधवा को पति की चिंता में डाल देना नैतिकता माना जाए, जिस धर्म में ऐसी कथा हो कि मोरध्वज और उसकी पत्नी भगवान को ख़ुश करने के लिए बेटे को आरी से चीरते हैं, जिस देश में मनु महाराज विधान देते हैं कि यदि द्विज शूद्र को मार डाले; तो वह उतना ही प्रायश्चित करे, जितना सूअर या कुत्ते को मारने पर—उस जाति की संवेदना, मूल्यचेतना, मानव-गरिमा की भावना, अध्यात्म चेतना को फूल चढ़ाए जाएँ या उस पर थूका जाए।