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विनोबा भावे के उद्धरण

जिन्हें तालीम नहीं मिली है; ऐसे अपढ़ मनुष्य को जो अपना रस नहीं पहुँचा सकता, उसका ख़ुद का रस का झरना सूख गया है—ऐसा मैं तो मानता हूँ।