रामधारी सिंह दिनकर के उद्धरण
जैन और बौद्ध संप्रदायों के कवियों ने सरस कविताएँ नहीं लिखीं, क्योंकि जीवन के सरस निकुंजों तक जाने की छूट उन्हें प्राप्त नहीं थी।
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