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श्री श्रीठाकुर अनुकूलचन्द्र के उद्धरण

जगत् के समस्त ऐश्वर्य-ज्ञान, प्रेम एवं कर्म, जिनके अंदर सहज उत्सारित है और जिनके प्रति आसक्ति से मनुष्य का विच्छित्र जीवन, एवं जगत् के समस्त विरोधों का चरम समाधान लाभ होता है—वे ही हैं मनुष्य के भगवान।

अनुवाद : श्रीरामनंदन प्रसाद