Font by Mehr Nastaliq Web

उमर ख़य्याम के उद्धरण

जब तक मेरा हृदय उसके प्रेम में पागल था, तब तक मैं वंचित नहीं था और उसका हर भेद मुझ पर प्रकट था। अब जब मैं बुद्धि से देखता हूँ तो मुझे ज्ञात हुआ कि मुझे कुछ भी ज्ञात नहीं था।