जे. कृष्णमूर्ति के उद्धरण
जब तक मन भय से पूर्णतः मुक्त नहीं हो जाता, तब तक हर प्रकार की क्रिया वस्तुतः और अधिक उपद्रव, और अधिक दु:ख, और अधिक अशांति ही उत्पन्न करती है।
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