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वात्स्यायन के उद्धरण

जब नायिका अपने अंगों के हाव-भाव दिखा; स‌द्भाव प्रकट कर चुकी हो, तो निशानी के तौर पर अपनी कोई प्रिय वस्तु उपभोग के लिए नायिका को दे, और नायिका की कोई प्रिय वस्तु स्वयं उपभोग के लिए ले लेना चाहिए।