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वात्स्यायन के उद्धरण

जब नायक-नायिका परस्पर; एक-दूसरे के सहारे खड़े होकर या किसी दीवाल या खंभे के सहारे खड़े होकर संभोग करते हैं, तो उसे 'स्थिररत' कहा जाता है।