जब एक बार आप पुस्तकों के बक्सों के पहाड़ों के समीप जा पहुँचते हो ताकि उपयुक्त पुस्तकों को उनमें से खोद निकालो और उन्हें दिन के, बल्कि शायद रात के उजाले के सामने उजागर कर दो, तब ओह, कैसी-कैसी स्मृतियाँ आपके दिमाग़ में झूम पड़ती हैं!
अनुवाद :
इंदु प्रकाश कानूनगो