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जे. कृष्णमूर्ति के उद्धरण

जब आप किसी अद्भुत पर्वत के शाश्वत हिममंडित शिखर को देखते हैं, या नीले आकाश की पृष्ठभूमि में पर्वत की शृंखलाओं को देखते हैं, तब एक क्षण के लिए उस पर्वत की विराट्ता, आपके अहं को यानी 'मैं' तथा उसकी समस्त समस्या और चिंता को परे हटा देती है।

अनुवाद : हरीश