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उमर ख़य्याम के उद्धरण

ईश्वर-प्रेमी सदैव ईश्वर की धुन में मस्त व पागल रहता है। दीवाना व पागल सदैव निश्चिंत रहता है। होश में रहने पर हर वस्तु का खेद उसे होगा और जब ईश्वर-प्रेम में मस्त हो गया तो जो हो गया वह हो गया, उसे क्या चिंता?