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महात्मा गांधी के उद्धरण

ईश्वर के सामने हम सभी गोपियाँ हैं। ईश्वर स्वयं न नर है, न नारी है, उसके लिए न पंक्तिभेद है, न योनिभेद है। वह 'नेति नेति' है। वह हृदयरूपी वन में रहता है और उसकी बंसी है अंतरनाद।