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विलियम एच. मैकरेवन के उद्धरण

हम सब एक दिन ख़ुद को गले तक कीचड़ में फंसा पाएँगे। वह समय ज़ोर से गाने का; खुलकर मुस्कराने का, अपने आस-पास के लोगों को ऊपर उठाने का और उनमें आशा जगाने का है कि आने वाला कल बेहतर दिन होगा।

अनुवाद : महेंद्र नारायण सिंह यादव