Font by Mehr Nastaliq Web

आचार्य रामचंद्र शुक्ल के उद्धरण

ज्ञान के अधिकारी वे ही हो सकते हैं, जिनमें बुद्धि का विकास अधिक हो, जिनकी ग्रहण शक्ति शास्त्रचिंतन आदि द्वारा परिष्कृत, व्यवस्थित और समुन्नत हो। पर भक्ति का अधिकार; गहरी से गहरी भक्ति का अधिकार, मूर्ख से मूर्ख को भी पूरा रहता है।