Font by Mehr Nastaliq Web

श्यामाचरण दुबे के उद्धरण

गांधी जी ने कहा था कि हम स्वस्थ सांस्कृतिक प्रभावों के लिए अपने दरवाज़े-खिड़की खुले रखें, पर अपनी बुनियाद पर क़ायम रहें। उपभोक्ता संस्कृति हमारी सामाजिक नींव को ही हिला रही है। यह एक बड़ा ख़तरा है। भविष्य के लिए पह एक बड़ी चुनौती है।