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वात्स्यायन के उद्धरण

विपरीत रति के अंतर्गत; दूसरी बार संभोग प्रारंभ करने पर नायिका को प्रारंभ से ही पुरुष के ऊपर चढ़कर संभोग करना चाहिए—यह विपरीत रति का द्वितीय मार्ग है।