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वात्स्यायन के उद्धरण

विद्वान पुरुषों के द्वारा पूजित, खलों, दुष्टजनों के द्वारा भी सम्मानित तथा नायिकाओं द्वारा भी सुपूजित, जीवन की आनंददायिनी चतुष्षष्टि कला का सभी सम्मान करते हैं।