दु:ख और रोग एक ही चीज़ नहीं है। कोई व्यक्ति बिना बीमार हुए भी दु:ख से गुज़र सकता है और बिना दु:ख झेले भी बीमार पड़ सकता है। दु:ख विशुद्ध रूप से इंसानी मामला है, जो पहले से ही किसी न किसी रूप में इंसानी ज़िंदगी का हिस्सा इस तरह से है कि कुछ परिस्थितियों में यह बिल्कुल यही 'मुसीबत रहित होना' है, जो वास्तव में कोई रोग हो सकता है।
अनुवाद :
महेंद्र सिंह यादव