Font by Mehr Nastaliq Web

भामह के उद्धरण

धर्मशास्त्रों तथा उनके द्वारा स्थापित मर्यादा को आगम कहते हैं। उन धर्मशास्त्रों तथा उनके द्वारा स्थापित लोकमर्यादा के आचरण के अतिक्रमण से आगमविरोधी दोष होता है।

अनुवाद : रामानंद शर्मा