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वात्स्यायन के उद्धरण

धर्म का आचरण अवश्य करना चाहिए, क्योंकि धर्म का प्रतिपादन करने वाले वेद और शास्त्र, ईश्वरकृत एवं मंत्रद्रष्टा ऋषियों द्वारा प्रवर्तित होने के कारण सत्य एवं प्रामाणिक हैं।