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स्वामी विवेकानन्द के उद्धरण

धार्मिक होने के लिए सर्वप्रथम तुम्हें पुस्तकें फेंक देनी होंगी। पुस्तकें जितनी कम पढ़ो, उतनी भलाई है। एक समय में एक ही काम करो।

अनुवाद : पण्डित द्वारकानाथ तिवारी