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श्री श्रीठाकुर अनुकूलचन्द्र के उद्धरण

दौड़कर जाओ, किंतु हाँफ न जाना और ठोकर खाकर जिसमें गिर न पड़ो, दृष्टि रखो।

अनुवाद : श्रीरामनंदन प्रसाद