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वात्स्यायन के उद्धरण

चुम्बन, नखक्षत और दंतक्षत के प्रयोग में कोई पौर्वापर्य (अनुक्रम) क्रम नहीं होता। अनुराग की अधिकता से; संभोग के पहले इनका प्रयोग प्रधान रूप से करना चाहिए और प्रहणन एवं सीत्कार का प्रयोग, संभोग-काल में करना चाहिए।