आदि शंकराचार्य के उद्धरण
ब्रह्म सत्य है। जगत् मिथ्या है। जीव ब्रह्म ही है, भिन्न नहीं। जो भी उत्तम शास्त्र है, वह इसी से जानना चाहिए। यह वेदांत का डंका है।
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